पिछले दिनों मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की कलेक्टर संस्कृति जैन का तबादला नगर निगम भोपाल कमिश्नर पद पर हुआ। उन्हें मोरमुखी सजी-धजी पालकी में बिठाकर विदाई दी गई। मैडम के बाजू में उनकी बेटियां बैठी थीं। पालकी के कहार थे कलेक्टर के मातहत अधिकारी। विदाई गीत सजन से मिलन को चली बज रहा था। संभवतः ऐसी सामंती विदाई भाजपा शासन में किसी कलेक्टर की होना चौंकाने वाली घटना थी। लोग इस सामंती विदाई को देखते रह गए।
इस घटना से उभरे अभी चंद रोज़ ही हुए थे कि सिवनी नगर की एसडीओपी पूजा पांडे ने जिनके कंधों पर अपराधियों की पकड़ की जिम्मेदारी थी, ने अपने मातहत पुलिस कर्मचारियों के साथ हवाला डकैती का नया अध्याय लिख दिया।
सिवनी जिले के बंडोल थाना इलाके में 8 अक्टूबर 2025 की देर रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पुलिस विभाग की छवि पर ही सवाल खड़े कर दिए। कटनी से महाराष्ट्र के जालना जा रही एक कार में हवाला की मोटी रकम होने की टिप मिली थी। NH-44 पर शीलादेही बायपास के पास SDOP पूजा पांडे की अगुवाई में बंडोल थाना प्रभारी अर्पित भैरम और उनकी टीम ने वाहन रोका। तलाशी में कार सवार सोहनलाल परमार और उसके साथी से करीब 1.45 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए, जो नागपुर ले जाए जा रहे थे। लेकिन इसके बाद का कांड चौंकाने वाला था। इस मामले में कहा जा रहा है कि पुलिस वालों ने ड्राइवर व साथियों को जमकर पीटा, धमकियां दीं और राशि का आधा से ज्यादा हिस्सा हड़प लिया।
पीड़ितों का दावा है कि कुल 2.96 करोड़ रुपये थे, लेकिन सिर्फ आधे की ही जब्ती दर्ज की गई। ड्राइवर को पीट-पीटकर भगा दिया। सूत्रों का कहना है कि गाड़ी कटनी से नागपुर जा रही थी। रात 1 से 2 बजे के बीच का समय था। महाराष्ट्र की नंबर की एक गाड़ी को पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन गाड़ी नहीं रुकी। इस पर पुलिस ने गाड़ी का पीछा किया। आखिरकार सीलादेही इलाके में जाकर व्यापारी को गाड़ी रोकनी पड़ी।
गाड़ी की चेकिंग शुरू हुई। पुलिस के मुताबिक, इसमें करीब डेढ़ करोड़ रुपये थे। पुलिस को पैसे के साथ व्यापारी को हिरासत में लेना था। आरोप है कि पुलिस वालों ने ऐसा नहीं किया, बल्कि इतनी बड़ी रकम देखकर मन डोल गया। इसलिए उन्होंने एसपी को भी यह जानकारी नहीं दी।
आरोप है कि पुलिस ने व्यापारी को बिना कोई कानूनी कार्रवाई किए जाने दिया। ज्ञात हुआ है पूजा पांडे ने राशि आधा-आधा बांटकर मामला सुलझा लिया था।
लेकिन हकीकत तब सामने आई जब अगली सुबह यानी 9 अक्टूबर को व्यापारी सिवनी कोतवाली में आया और रात में हुए वाकये की शिकायत की। व्यापारी ने चेकिंग में शामिल पुलिस वालों पर 3 करोड़ रुपये जब्त करने का आरोप भी लगाया।
पुलिस एक करोड़ पैंतालीस लाख जब्ती बता रही वह लूट की पूरी राशि नहीं है यह तो बंदर बांट में मिली राशि है जो चतुराई से पूजा ने प्राप्त कर ली थी।
इस घटना के बाद दस पुलिस कर्मी और पूजा पांडे को निलंबित कर दिया गया है और सोहनलाल परमार और उसके साथियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है किंतु इस लूट की मास्टर माइंड पूजा पर अभी तक एफआईआर नहीं की गई है।जो चर्चाओं में है।
बहरहाल, हवाला की लूट की यह कहानी नई नहीं हो सकती। ये सिलसिला पहले से चल रहा होगा। लगता तो ऐसा है कि एक महिला पुलिस अधिकारी को देखकर हवाला से जुड़े परमार को ताव आ गया हो और उसने इसका भंडाफोड़ कर दिया और पूजा पांडे फंस गईं, मैनेज नहीं कर पाईं।
इसलिए ज़रुरी है कटनी से लेकर नागपुर तक जो हवाला कारोबारी हैं उनकी तलाश कर पूछताछ हो तो ऐसे कई पुलिस अधिकारी मिल जाएंगे जो इन कारोबारियों से जुड़े हुए हैं और आसानी से यह कारोबार चलने दे रहे हैं। सोचिए, यदि सुरेन्द्र परमार कोतवाली जाकर यह शिकायत दर्ज़ न कराता तो मध्य प्रदेश पुलिस की इस लूट का भंडाफोड़ भी ना होता।
यह कांड पुलिस के माथे पर कलंक है। देश में नेताओं, उद्योगपतियों, शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों की लूट की ख़बरें आए दिन मिलती हैं फिर पुलिस भी इसी समाज का हिस्सा है उसे क्या लूट करने की छूट दी जा सकती है। पुलिस यदि ईमानदारी से कार्य करे तो उपर्युक्त लुटेरों को कटघरे में खड़ा कर सकती है बशर्ते वह ईमानदार हो, उनमें एका हो और कर्तव्य के प्रति समर्पण हो।
यह हवाला कांड अभी भी यदि पुलिस उजागर कर पाती है तो यह उसके और देश के लिए महत्वपूर्ण काम होगा। यदि उसी धारा में पुलिस भी बह जाती है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। देश की बर्बादी की वजह होगी। एक अकेला संजीव भट्ट या पूर्ण कुमार जैसे अधिकारी भला क्या कर सकते हैं?
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)